Tagged: तेजाब से घायल

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ज़ज्बा है मेरे दिल में (jazba hai mere dil men)

कवित्री – रत्ना मेरे मन को तोड़ सके जो,नहीं है कोई ऐसी चीज । हो भरम में परे हुए तुम, मैं जिऊँगी जग को जीत।। ये घातक तेजाबी हमले, मुझको रोक न पाएँगे ।...