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दर्द तेजाब का (dard tezab ka)

  कवित्री – रत्ना दर्द को पीकर बहने बेटी, जीने को संघर्ष करे। माफ़ करू कैसे मैं उसको, जो सबकी जीवन भंग करे।। क्यों बैठे हम देख रहें सब, समझे न क्यों उसका दर्द।...