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Chala Daur Badalane Ka Ab1 0

Chala Daur Badalane Ka Ab (चला दौड़ बदलने का अब)

Poet: Ratna चला दौड़ बदलने का अब, रुख़ चाहत के बदल रहें हैं। जिधर भी देखो इंसानो को, अपनों से मुँह मोड़ रहें हैं।। दौलत ने इन्सां को बदला, खो गया आज है अपनापन।...